1885 में जन्मी कांग्रेस ने यह सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन अस्तित्व बचाने के लिए इतना संघर्ष करना पड़ेगा। खैर इन दिनों पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी “भारत जोड़ो यात्रा” में व्यस्त हैं, वहीं शशी थरूर व मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की रेस शुरू हो गई है।
भारत जोड़ने वाली यह यात्रा तो कांग्रेस छोड़ो यात्रा बन गयी है। जहां राहुल गांधी कांग्रेस की भूमि मजबूत बनाने निकले थे वहीं गोवा विधानसभा में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। 11 कांग्रेस विधायकों में से 8 भाजपा में शामिल होने की राह पर निकल पड़े हैं। इस सामूहिक दलबदल के बाद 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा में कांग्रेस की ताकत घटकर महज 3 विधायकों तक रह गई है। कुल मिलाकर खाया पिया कुछ नहीं और गिलास तोड़ा बारह आने।
चापलूसी और परिवारवाद में घिरी कांग्रेस
गौरतलब है कि यह वही कांग्रेस है जिसके सदस्य सुभाष चंद्र बोस, पटेल, नेहरू, राजेंद्र प्रसाद एवं गांधी जैसे स्वतंत्रता सेनानी रह चुके थे। लेकिन कांग्रेस की वर्तमान स्थिति की सबसे बड़ी वजह चापलूसी और परिवारवाद है। कांग्रेस इसमें कुछ इस प्रकार से घिर गयी कि वहां से निकलने की वो नाकाम कोशिश आज तक कर रही है। यहां एक बात जो कांग्रेस से सीखने योग्य है वो है लाख बेज़्ज़ती हो जाने के बाद भी कैसे हिम्मत न हारें। कई बार लॉन्च हो चुके राहुल बाबा अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं किंतु हाथ क्या आता है, बाबा जी का ठुल्लू।
