जहाँ एक तरफ अनुपमा वनराज को उसकी औकात दिखाती वहीं दूसरी तरफ हमें माया एक और चाल चलती है और ये होता है फिज़िकली हैरासमेंट का क्योंकि वो समझ जाती है
अनुज को रोक नहीं सकती है तो उसके पास में लास्ट ऑप्शन है। वो ऐसे मीडिया के सामने दिखा सके की हाँ शादी हो चुकी थी और ये हमारे साथ रह रहे थे। अब ये हमारे साथ में नहीं है।
जीस कारण सिंदूर भी लगाती है लेकिन इसके साथ में अब माया के साथ में हम राज़ मिल जाता है और वो ये फैसला करता है की वो ना हो। अनुज को किसी कैसे केस में फंसाना है जिसकारण अनुज हमेशा के लिए माया के पास में रह जाए और कभी वो माँ के पास में ही ना लेकिन अनुज तो की लौ कर चुका है
की चाहे कुछ भी हो जाएगी वो उसे नहीं रोक सकता। स्टार्टिंग है तब स्टार्टिंग वनराज विहार से होती है। यहाँ ये लोग बात कर रहे हो की ना डिम्पी की शादी होगी ना ही अनुमान उसको माफ़ करेगी।
तब तक अनुपमा आ जाती है और ये बताती है कि मेरी शादी के बारे में आखिर इस घर में बात हो क्यों रही है? मुझे नहीं पता की क्या बात है। आप लोग कर रहे हैं लेकिन एक बात याद रखेगा की मेरी प्रॉब्लम मेरे साथ में है। आपको सब कुछ दिख रहा है।
आप लोग आँखों का दर्द दिख रहा है, तकलीफ दिख रही है लेकिन आपका ये समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर ये कितना प्यार करता है। डिम्पी से इसके साथ ही टूट रही है। कभी कोई समझ नहीं पाता कर रही है। आपको समझ में नहीं आता अब वनराज भी यहाँ पे बहुत बेशर्मी की तरह समझो तो उसको देखके हंस रहा होता है और ऐसे हसरत है जिसे लग रहा जैसे की कितना बड़ा कमिना है।
यह समझाने की कोशिश करती है की देखिये आप लोग जो कर रहे हैं वो बिल्कुल भी गलत है और ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए और वो बोलते है की नहीं नहीं हम लोग ये चाहते हैं कि अनुज नहीं,
क्योंकि अनुज ने तेरे साथ गलत किया है तो हम उसका मुँह भी नहीं देखना चाहते तो वहाँ पे ये बता दी तब तो गलत तो आपने मेरे साथ किया है। आपने तो 26 साल मेरे साथ गलत किया है और सबसे ज्यादा गलत आपने और आपके बेटे ने किया है
तो क्या आप अपना मुँह देखना बंद कर देंगे? क्या आप अपना बेटे का मुँह देखना बंद कर देंगे? यहाँ पे जो न लताड़ लगाते है ना आज सही मायने में जो बात है वो बोलती है जो उसके दिनभर आस होती है वो सामने सबके सामने बोल देती है
ना की यहाँ पे अब करने कोशिश करता है की मुझे पता है तुम्हारे दिल में तकलीफ है। तुम अनुज गुस्सा हो, तुम्हारी आँखों में दर्द दिखता है तो बताती हैं मेरी आँखों में दर्द दिखता है।
हर एक कभी अपने बेटे का भी आँखों में दर्द देख लीजिये की वो डिम्पी के लिए क्या महसूस करता है आपको तो जो मर्जी था वो करवा दिए। अगर सबसे ज्यादा किसी को खुशी होती है तो वो होते हैं बाबूजी। नागरिक को भी बहुत कुछ होता है, चुपचाप सुन रहे होते हैं और मज़े ले रहे होते है
ना ऑलरेडी। तब तक डिम्पी आ जाते हो और डिम्पी आती है तो ये लोग बोलते है लोग भी तो यहाँ की वह बाहर निकल तब तक अनुपमा जाते हैं, उसको समझाने की कोशिश करते है
की देख एम पी जो चीज़े हो ये देख मैं मानती हूँ की वो चीजें नहीं होनी चाहिए अगर तू चाहती है की जैसे की अनु जाएंगे इस शादी में तो मुझे कोई तकलीफ होगी देख मुझे कोई तकलीफ नहीं हो तो प्लीज़ उन्हें भूला और हाँ शादी होगी और घरवालों की बातें तो बिल्कुल क्योंकि ये लोग बेवकूफ और बेवकूफ़ी की हदें पार कर चूके हैं
और इन को समझाने से कोई फर्क नहीं पड़ता यहाँ पे आप समझो तो एक नया प्लान बनाते है की वनराज के थ्रू समझो तो कैसे भी कन्विंस करवाने की? लेकिन वो तो साफ साफ मना कर चूके हैं।
अनुपमा बिल्कुल किसी की नहीं सुनने वाली और वो सिर्फ अपने बेटे और सभी की बात को मानते हैं। मुझे तो इस घर में आना भी नहीं था लेकिन मैं आई हूँ डिम्पी और समर की कारण आप लोगों के लिए नहीं और ना ही आप लोग आज के बाद से मेरे बारे में और ना ही अनुज के बारे में बात कीजिये। अरे मेरे पति हैं मेरे साथ में उनके प्रॉब्लम होती है।
आप लोग को क्या लेना देना है? आप लोग कीजिए ना आप लोग का खुद की घर में कोई प्रॉब्लम सॉल्व नहीं होती। घर में चले हैं प्रॉब्लम सॉल्व करने के लिए तब तक आप वो अनुज का फ़ोन आता है, अनुज का फ़ोन आता है तो अब वनराज फ़ोन उठाने वाला नहीं है। वो बोलता है की तुमने मुझे इतनी बातें सुनाई।
अब कपाड़िया इतना बातें सुनायेंगे? मुझे बिल्कुल भी सुनने का मन नहीं है और मैं नहीं उठाऊंगा। फ़ोन वहाँ बापूजी बोलते है की फ़ोन उठा रहे हैं की नहीं, बापूजी फ़ोन नहीं उठा लूँगा। कोई भी बोलता है तो फ़ोन नहीं उठा, अनुपमा आती है और घर का फ़ोन खुद उठाती है
और फ़ोन उठा करके डाल करके देती है यहाँ पे अब क्योंकि ये जानबूझ कर के नहीं उठा रहा है तो कहीं कुछ अच्छा हो गया तो आप भी यहाँ पे जैसे फ़ोन उठता है तो यहाँ सबसे पहला शब्द होता है की कैसे वनराज और हाँ
एक काम करो ये डिम्पी और समर के साथी को प्लीज़ होने दो और देखो वो तुम्हारे बच्चे हैं, मेरे बच्चे हैं। और अगर तुम चाहते हो कि मैं इस शादी में नाउ तो मैं वादा करता हूँ
कि मैं शादी मैं नहीं आऊंगा, क्योंकि अगर तुम्हें लगता है की शायद मेरे आने से किसी को कोई प्रॉब्लम होगी तो? लेकिन एक बात याद रखना कि देखो अगर इनकी शादी टूट जाती है, अगर शादी नहीं हो पाती है तो मैं दर्द समझता हूँ, दूर हो करके कितनी बुरे लगते हैं
आज बाकी जब मेरे पास में ही तो मुझे आज समझ में आया। मुझे पहले लगता था कि बाकी यहाँ पे फालतू की आई है, लेकिन अब समझ में आ रहा है कि बाकी के आ जाने से कितनी चीजे अच्छी हो चुकी है।
उसने समझाया कि प्यार का महत्त्व क्या होता है और वो बताता है कि मैं अनुज से बहुत ज्यादा प्यार करता हूँ। देखो जब मैं दूर हुआ तो अब समझ में आ रहा है ना डैड की कभी कभी चीज़े होती है की हमे अंधेरे में भी दिख रहा है, स्टार्ट हो जाता है। कई बार उजाले में हमें कुछ नहीं दिखता, लेकिन जब अंधेरा होता है
तो हमें समझ में आ जाता है की कौन हमारे अपने हमारे पर आया है। यहाँ माया भी ये सारी बातें सुनकर बहुत परेशानी होती है की यार अब क्या करे, क्या ना करे इसके पास कोई ऑप्शन नहीं होता है। चुपचाप खड़े होकरके मूर्ति बनकर के कोने में खड़े रहने के अलावा अनुभव के बारे में भी बातें बोलता है की मैं उससे दूर हूँ।
अब मुझे हिम्मत मिल रही है कि मैं जब हिम्मत जुटा हुआ है उसके सामने आऊंगा। मैं जरूर उससे बातें करूँगा और मैं जरूर से माफ़ी मांगा में दर्द के साथ में एक फील्ड मैं भी हूँ की मैंने उसके साथ में कितना गलत किया था। मैं उस अंधेरे में छोड़ कर के आ गया था।
वैसी अवस्था में मुझे बिल्कुल उसके साथ में होना चाहिए। जीस अवस्था में उसको छोड़ करके आया था। अब यहाँ तुम उसके दोस्त होना अरे हाँ, वैसे भी अमन राज़ जो दोस्ती दोस्ती करता था उसके ले करके इसको अभी भी गुस्सा होता है जिसका ये बोलता है
की तुम उसके दोस्त होना देखो। मैंने तो अनुपमा की मॉम से एक ही न्यूस भेजो एक संदेश भिजवाया था अनुपमा के लिए घूम मेरा इंतज़ार ना करे क्योंकि मैं कभी नहीं आने वाला, लेकिन मैं आज तुम्हारे तुम से एक संदेश भेजने वाला हूँ ये तुमसे एक मैसेज भेजने वाला हूँ
अनुपमा के लिए की बोल देना की वो मेरा इंतज़ार करे, मैं आ रहा हूँ और मैं सब कुछ ठीक कर दूंगा बस मुझे थोड़ा सा वक्त लगेगा। क्या होता है क्या लंबे ये सारी बातें सुनने के बाद उसके पैरों से जमीन खिसक जाती है? समझो तो ऐसे गिरने लगती है लेकिन ये खुशी के मारे गिर रही होती हैं।
दुख तकलीफ के कारण नहीं है। बस ये ऐसे गिर रहे होते तब तक हमारी सभी लोग दौड़ कर के आते हैं। हैलो इसको पकड़ ले तो ऑफ कर ले लो और बापूजी की यहाँ पे देखने लायक बहुत कुछ होता है लेकिन बाकी हालत खराब हो जाती है और साथ में क्योंकि वह ऐसे ही सारे कर रहे हैं। वनराज पास में की अब तेरे पास क्या प्लानिंग है?
कुछ तो बचा ही नहीं ना तो खैर देखो इसके साथ में सोते नहीं की जाती थी, लेकिन पोर्ट्स वो मज़े दे देती है। अब क्या होता है की बात तो सब सब बोल देते है की आप अनुपमा तो आने वाले है नहीं और काव्या कहते है ना की अगर इनको जलाने के लिए अगर कोई चीज़ चाहिए तो वो माचिस नहीं बल्कि काव्य क्योंकि काव्या इनको एक एक बातों से जला देती है।
रामगढ़ क्या कर बोलती है की अरे मनराज तुम तो कुछ कर ही नहीं पाए और लंबा तब जा रही है। और हाँ, अनुज आएगा और यहाँ रिस्पेक्ट के साथ में अनुपमा को ले करके जाएगा और तुम खड़े हो करके देखते रह जाओगे, वो बोलता है की अनुजा या नहीं हैं।
अनु जायेगा ना? अभी आया तो नहीं ना उसके मैं उससे मैं आने ही नहीं दूंगा। मतलब की ये फैसला कर लेता है की अनुज को रास्ते से हटाने के हटाने का मतलब होता है कि शायद एक्सीडेंट करवा देना। कुछ ऐसी चीजें और माया के साथ मिलकर के ये चाल चलता भी है।
फिज़िकली हरासमेंट का उसपे केस लगवाता है और वो ये बोलता है की अगर मतलब समझो तो ये माया उसको ब्लैकमेल करती है की अगर आपको बाहर निकलना है, अनुपमा की चिंता है, छोटी की इच्छा है ये तो आप मुझसे शादी करनी होगी लेकिन लेकिन लेकिन तनुज इतना बड़ा बेवकूफ नहीं है क्योंकि बिज़नेस मैन वो भी है।
उसके पास में भी आइडियाज़ हैं। आखिर इतना दिन उसके घर में रहा। अब माया फैसला कर लेती की अब मैं आपको जाने नहीं दूंगी और वो सिंदूर लेकर के खुद से ही लगा लेते हैं। खुद से ही मंगलसूत्र पहले अनुज के नाम की जहाँ अनुज एक तरफ जाने की पूरी तैयारी कर चुका होता है की अब छोटी के साथ में वो जाने वाला है तब तक पीछे से आ करके धप्पा मैं आपकी बीवी हूँ।
आप कैसे जाओगे ना की अब इस चीज़ को देखने के बाद में सारा खेल समझ में आ जाता है की आखिर माया मुझे मेनू प्लेट क्यों कर रही थी? अनु माँ के लिए अब समझ में जब आता है तो उसकी रिलाइज होता है कि माया कितनी बड़ी कमीनी है……
