आखिर एक लड़की के मायके में उससे कभी यह क्यों नहीं पूछा जाता है कि वह अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश है या नहीं तो अनुपमा कहती है कि भले ही आप जो है वो तलाक लेने के खिलाफ हो लेकिन घरेलू हिंसा सहने से बेहतर तलाक लेना है इसके बाद गौतम जो है
वह अपनी चाल चलता है और अचानक वह खुद को थप्पड़ मारने लग जाता है और पाखंड करता है और पराग और मोटिवा उसे रोकते हैं तो पराग गौतम को ऐसा करने से रोकता है और गौतम कहता है कि मैं क्या करूं मैं मर्द हूं ना तो मेरी बात यहां कौन सुनेगा आप सब ऐसे घटिया इल्जाम को सच मान लेंगे ऐसे इल्जाम लगाने से तो अच्छा है कि मैं मर ही जाऊं और यह लोग
बाहर वाले हैं लेकिन आप लोग तो मेरे अपने हैं मेरा परिवार है मेरे लिए तो अपने परिवार से बढ़कर हैं लेकिन आप लोग भी इनकी बातों पर विश्वास कर रहे हैं तो पराग जो है वो कंफ्यूज हो जाता है और गौतम जो है वो पराग से कहता है कि यह मां बेटी और यह अंश जो है यह तीनों झूठ बोल रहे हैं
यह सुनकर सभी चौक जाते हैं और गौतम कहता है कि मैं अपनी बीवी की भाभी पर गंदी नजर डालूंगा क्या मैं इतना घटिया इंसान हूं हम दोनों आपके साथ आपके घर में रहते हैं रात दिन आपके सामने रहते हैं क्या आपने कभी कुछ देखा या सुना प्रार्थना को तकलीफ देना तो दूर की बात है कभी किसी ने मुझे
प्रार्थना के साथ ऊंची आवाज में बात करते हुए भी सुना है तो गौतम यहां पर अनुपमा और राही पर इल्जाम लगाते हुए कहता है कि यह मां बे बेटी मुझसे बदला लेना चाहती हैं उस दिन हल्दी में जब मैंने राही के पापा को बुलाया और उन्होंने इसकी मां का सारा सच आपके सामने ला दिया इसीलिए यह मुझसे बदला लेना चाहती हैं
गौतम आगे कहता है कि इनको लगता है कि यह बड़ी समझदार है इन्होंने चार दिन में मेरा वह रूप देख लिया जो आप लोग इतने सालों में नहीं देख पाए क्या कोठारी खानदान में इतनी अकल नहीं है कि वह मुझे इतने सालों में पहचान नहीं पाए