यह सुनकर सभी लोग हैरान रह जाते हैं तो प्रेम यहां पर राही से पूछता है तो राही जो है वह मेहंदी वाले दिन की पूरी बात यहां पर प्रेम को बताती है और प्रेम यहां पर आग बबूला हो जाता है और तभी वहां पर वो गौतम से कहता है कि मैंने जिंदगी में बहुत कमीने देखे हैं
लेकिन तुमसे बड़ा कमीना मैंने कोई नहीं देखा और तभी वहां पर प्रेम जो है वो गुस्से में गौतम को मारने के लिए जाता है तो अनिल और तोशो उसे रोक लेते हैं और प्रेम कहता है कि इस इंसान ने मेरी बहन के साथ जुल्म किया और मेरी राही के साथ बदतमीजी की है तो इसे तो अब पुलिस ही ठीक
करेगी और आज जो है व दामाद पूजन होकर रहेगा तो प्रेम जो है वो उनसे छुड़ाने की कोशिश करता है लेकिन अनिल उसे शांत रहने के लिए कहता है तो प्रेम यहां पर गुस्से में प्रार्थना और राही से कहता है कि तुम दोनों ने मुझे क्यों नहीं बताया तो प्रेम अनुपमा से कहता है कि आप तो मुझे बता सकती थी ना
आपको मुझे तो बताना चाहिए था तो तभी वहां पर अनुपमा भी कहती है कि मैंने जो है वो राही की बात मानकर गलती की है लेकिन आज मैं किसी की नहीं सुनूंगी अगर मैं आज भी चुप रह जाती तो पता नहीं यह प्रा पर कब तक और जुल्म करता रहता तो तभी वहां पर पराग
जो है वह चिल्लाकर कहता है कि बंद करो यह तमाशा पराग जो है व भयंकर गुस्सा हो जाता है और हाथ जोड़कर सभी से कहता है कि कृपा हमारे परिवार के लोगों के अलावा बाकी सब लोग यहां से चले जाइए तो सभी मेहमान जो है वो वहां से चले जाते हैं
और अनिल भी मीडिया को संभालने के लिए कहता है इसके बाद यहां पर प्रेम जो है वो पराग से कहता है कि आप जो है वोह अपने दामाद के लिए पुलिस बुलाएंगे या फिर हम बुलाएं तो तभी वहां पर पराग जो है वो गुस्से में चलाकर प्रेम को चुप रहने के लिए कहता है और परा कहता है कि खबरदार जो किसी ने भी जमाई जी के साथ बदतमीजी की या हाथ लगाने की कोशिश
की तभी वहां पर अनुपमा कहती है कि आपने सुना नहीं मैंने क्या कहा पराग गुस्से में कहता है कि आपने जो बोलना था आप बोल चुकी हो और यहीं पर चुप हो जाइए वरना अच्छा नहीं होगा तभी वहां पर अनुपमा भी गुस्से में कहती है कि अच्छा ना हो तो ना सही अपनी बेटियों को बाहर भेजने से डरते हो
लेकिन गौतम जैसे भेड़िए उनका घर पर ही शोषण करते हैं एक सुरक्षित घर में रहना हर बेटी और हर बहू और हर औरत का अधिकार है तो अनुपमा कहती है कि उसे यकीन नहीं हो रहा है कि प्रार्थना का परिवार जो है वोह उसकी तकलीफ को इतने सालों तक देख ही नहीं पाया और वह सवाल उठाती है